Babaji Sri Ramesh Babaji Maharaj

शरणागति शरीर की नही बल्कि मन की होती है !
मन की शरणागति होते ही,
शरीर की शरणागति अपने आप हो जाती है !

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सूर्यं कभी नही पूछता कि अन्धकार कितना पुराना है !
अन्धकार आज का है या वर्षो पुराना है ?
सूर्य की किरणे तो अंधकार के पास पहुँचते ही उसे मिटा देती है !

ऐसे ही प्रभु की कृपा कभी यह नही पूछती कि सामने बाला कितना बड़ा पापी है !
प्रभु की कृपा होते ही जीव के समस्त पाप व् कष्ट मिट जाते है !

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जहाँ तक इन्द्रियाँ संसार में जाती हैं वो सब माया है |
इसमें डूबा हुआ कभी भी मुझे नहीं जान सकता |

भगवान् कहते हैं कि इन सबसे आगे चल |
आगे तब मैं मिलूँगा |
मेरा दिव्य एक रसमय रूप उसे मिलता है जो मुझे जान जाता है |
जिसे संसार की संपत्ति मोहित नहीं करती |
संसार में कोई भोग मोहित नहीं करता |
मुझे जानकर ही वो मेरा सर्वभाव माने हमारे पास जो कुछ है
ये इन्द्रियाँ , मन, बुद्धि , चित्त , अहंकार, जो कुछ भी है, वो सब श्रीकृष्ण का है, जान जाता है |

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साधन करना है तो ये मत सोचो कि कल करेंगे या परसों करेंगे !
कल और परसों कभी नही आएँगे !
इसी क्षण करो !

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