Who is a devotee -from Sri Gahvar Van Tarangini

.भक्त कौन है ?

भक्त वही है जिसके सामने धन, संपत्ति, जमीन, जायदाद इन मायिक चीजों का कोई महत्व नहीं | जैसे राजा बलि जी ने अपनी धन सम्पत्ति सब भगवान् को दे दी थी और अंत में अपना शरीर भी दे दिया था | इस कसौटी पर हम जैसे सब फेल हैं |

त्रिभुवनविभवहेत्वेअप्य्कुंठ …वैष्णवाग्र्य: || श्री मद् भागवत 11-02-53

भक्त कौन है ? भक्त उसको कहते हैं जिसके सामने तीनों लोकों की लक्ष्मी रख दो, तीनों लोकों की सुख सम्पत्ति रख दो, तीनों लोकों की भोग सामग्री रख दो लेकिन वो उसकी याद भी नहीं करता कि सामने लड्डू का थाल आ गया या कौन अप्सरा खड़ी है | ये बात उसकी स्मृति में भी नहीं आती |

भक्त आँखों से देखता तो है, ऐसा नहीं कि भक्त अन्धा हो जाता है | नहीं, पर देखने-देखने में फर्क होता है | एक बच्चा अपनी माँ की गोद में नंगा पड़ा रहता है और उसकी माँ भी, अपने सब वस्त्र खोल करके अपने स्तन से दूध पिलाती है | बच्चा अपनी माँ को नंगी देखता है ,लेकिन उसकी दृष्टि में भोग दृष्टि नहीं है |

तो उसी तरह से भक्त लड्डू भी देखता है, अच्छी स्त्री को भी देखता है, पर फर्क ये है कि उसकी स्मृति में ये बात नहीं आती है कि ये भोग है या ये सुंदर स्त्री है | क्योंकि जब मन स्वच्छ हो जाता है तब सर्वत्र केवल परमात्मा ही दिखाई देता है |

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