Sri Champakalata Sakhi

चंपकलता जी राधा जी की पाँचवी सखी है.

इनके निकुज स्थिति इस प्रकार है –

राधाकुडं के दक्षिण दिशा वाले दल पर “कामलता” नामक कुंज में निवास करती है.
जो कि अतिशय सुखप्रदायनी है. शुद्ध स्वर्ण की तरह कांतिमय है.

श्री चम्पकलता जी उसमे निकुज में विराजती है. ये कृष्ण की “वासक सज्जा” नायिका भाव से सेवा करती है.

यह वाम मध्या नायिका है चम्पक के समान इनकी देह कांति है ओर चातक छटा कि भांति श्वेत वस्त्र धारण करती है रत्नमाला पहराना और चामर झुलाने की सेवा है इनकी वयस १४ वर्ष २ मास १३ १/२ दिन की है

माता का नाम- "वाटिका",

पिता का नाम – "आराम"

और पति का नाम – "चंद्राक्ष" है.

राधा माधव सेवा -निकुंज में “वासक सज्जा” और "चामर सेवा " करती है .

श्री गौर लीला में –

कलियुग में श्री गौरलीला में यह "श्री शिवानंद" नाम से विख्यात हुई है.
चम्पकलता जी का मंत्र है –

"चम्पकलतायै स्वाहा "

संत जन इसी मंत्र का उच्चारण करके ध्यान करते है – चम्पकलता जी की ध्यान विधि –

चम्पकावलिसमान-कांतिकां चातकाभ-वासना सुभूषणाम् | रत्नमाल्ययुत चामरोघातां चारुचम्पकलतां सदा भजे ||

इनकी वस्त्र सज्जा कैसी है – जैसे चास होता है, अर्थात नीलकंठ पक्षी के पंख के जैसे वस्त्र है. जिनकी अति श्रेष्ठ चंपक के जैसे अंग क्रांति है,
जो सुन्दर रत्न जडित स्वर्ण चामर हाथ में धारण किये रहती है.
जो नील के परों की भांति वस्त्र धारण करती है.
जो गुणों मे विशाखा जी के समान है.

हे राधे ! आपकी सखी की मै शरण ग्रहण करता हूँ.

वास्तव में राधा माधव से मिलने के लिए हमें गोपियों के चरण पकडने है.

गोपीभाव उच्च है. जहाँ संतजन तपस्या के बाद भी नहीं पहुँच पाते है.

इनके यूथ में भी "आठ सखियाँ" है – कोरंगाक्षी, सुचरिता,
मंडली,
मणि कुण्डला, चंडिका, चन्दलतिका, कंदुकाक्षी, सुमंदरा ये आठ सखिया चम्पकलता के यूथ में सबसे प्रधान है,
सारी सखियाँ इनकी सेवा में है.

!! जय जय श्री राधे !!

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