15 February, 2013 15:27

पता नहीं क्या हुआ है आजकल
मुझे ही अपना मालूम नहीं,
और सब बयान कर सकते है मेरे दिल की बात आजकल
मुझे ही अपना पता नहीं
और सब को पता है की मुझे क्या चाहिए आजकल
पता नहीं क्या हुआ है आजकल

शायद एक खुल्ली किताब बन गया हु आजकल
मैं गलत अल्फाज़ बोलता हु,
और लोग सही मतलब उसका निकालते है आजकल
दिल के सफो पर भाषा क्या बदल गयी है आजकल
मैं कुछ और लिखता हु, लोग कुछ और पढ़ रहे है आजकल
पता नहीं क्या हुआ है आजकल

लगता है मैं मैं ही नहीं रहा आजकल
मुझे लगता है कि मैं मैं हु,
मगर लोग कुछ और जताते है मुझे आजकल
मेरा आईना भी पहचान नहीं पता है आजकल
पता नहीं क्या हुआ है आजकल

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: