Swami Sri Ram Sukhdasji –

यहाँ गलती हुई है । धन, सम्पत्ति, वैभव, पुत्र, परिवार, मान, बड़ाई आदि कभी होते हैं और कभी नहीं होते, घटते-बढ़ते हैं, सदा साथमें नहीं रहते, पर उनको अपना मान लिया । जो अपना है, उससे विमुख हो गये, उसकी उपेक्षा कर दी ! मीराबाईने कहा कि ‘मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरों न कोई ।’ हमने ‘दूसरों न कोई’‒इस बातको नहीं पकड़ा, इसीलिये ‘मेरे तो गिरधर गोपाल’‒इसका अनुभव नहीं हुआ । वे भगवान्‌ सबके हैं । वे प्राणिमात्रके हृदयमें रहते हैं‒‘ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ’ (गीता १८/६१) । उनकी तरफ हमें देखना चाहिये । मैं बहुत बार कहा करता हूँ कि भगवान्‌ सब देशमें, सब कालमें, सब वस्तुओंमें, सब व्यक्तियोंमें, सम्पूर्ण वृत्तियोंमें, सम्पूर्ण घटनाओंमें, सम्पूर्ण परिस्थितियोंमें, सम्पूर्ण अवस्थाओंमें रहते हैं । ऐसा कहनेका तात्पर्य क्या है ? वे सब जगह हैं तो यहाँ भी हैं, सब समयमें हैं तो अभी भी हैं, सबमें हैं तो हमारेमें भी हैं, सबके हैं तो हमारे भी हैं । इसलिये किसीको भी उनकी प्राप्तिसे निराश होनेकी जरूरत नहीं है । जो किसी देशमें हो, किसी देशमें न हो; किसी कालमें हो, किसी कालमें न हो; उसके साथ हमें सम्बन्ध नहीं जोड़ना है । उसका काम कर देना है, उसकी सेवा कर देनी है । उसके साथ सम्बन्ध जोड़ोगे तो दुःख पाओगे; क्योंकि वह सदा तो रहेगा नहीं । ‘जीवनोपयोगी प्रवचन’ पुस्तकसे

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