भगवान श्री कृष्ण या विष्णु को “हरि ” क्यों कहते है?

भगवान श्री कृष्ण या विष्णु को "हरि" क्यों कहते है?

श्रीपाद सनातन गोस्वामी लिखते है – पापं दुख चितश्व यथायथं हरतिती हरि: – भगवान पाप, दु:ख और चित्त को हरते है, इसीलिए उन्हें "हरि" कहते है। ऐसे भगवान बहुत- सी चीज़े हरते है, लेकिन मुख्यत: तीन चीज है -पाप, दु:ख और चित्त। भगवान् श्रीकृष्ण का यह स्वभाव है । जैसे सूर्य का स्वभाव है अंधकार को नष्ट करना । सूर्य अन्धकार को नष्ट करने के लिए मशाल नहीं जलाते या प्रयास नहीं करते है । सूर्य के उगते ही अंधकार स्वत: नष्ट हो जाता है । इसे सूर्य का स्वभाव कहते है । वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का स्वभाव है कि उनसे सम्बन्धित किसी भी वस्तु के संपर्क में आया जाय तो वे पाप (दोष) का विनाश कर देते है । मानसिक, शारीरिक, पारिवारिक संकट हो या बाहरी सामाजिक कोई विघटन हो, कुछ भी हो, वे हरि अपने आश्रित के सारे दु:ख को हर लेते हैं । इसीलिए उन्हें हरि कहते है ।
-श्री श्रीमद राधा गोविन्द गोस्वामी महाराज

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