पैदा हो तो आनन्द, मर जाय तो आनन्द, लाखों रुपये चले जायँ तो आनन्द, आ जाय तो आनन्द। शरीरमें बीमारी हो तो आनन्द, मिट जाय तो आनन्द। आनन्दको निरन्तर कायम रखना चाहिये । आनन्द तभी कायम रह सकता है जब कोई घटना हो तो उसे भगवान्‌ की कृपा समझे। यह समझे कि यह भगवान्‌ का मंगलमय विधान है। (अपात्रको भी भगवत्प्राप्ति)

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