21 July, 2014 13:48

एक –
चीख उठती है,
बंध मुख में
जैसे बाजु की क्वारी में फटता बम्ब
एक –
विष्फोट होता है,
बंद दिल में
जैसे बाजु की क्वारी में फटता बम्ब
एक –
सन्नाटा गूंजता है
बंद मन में
जैसे बाजु की क्वारी में फटता बम्ब
एक –
कुछ चीरने की आहट
कुछ फटने का एहसास
और कम्पते हाथ पैर (जैसे क्वारी विष्फोट से कंपता घर)
स्थिर आँखों के निचे,
भरे अश्रु सागर में कम्पन ,
कही वो दिसम्बर सी सुनामी न आये
बाहर से शरीर शांत (जैसे क्वारी विष्फोट में दूर से दीखता घर)
शायद उम्र के कुछ साल ठहस पड़े
पर दूर से थोड़ी दीखता है
आज के अरमानो की लाश चलो जला आये
‘क्या पता’ कल कुछ और लाशें आ जाए – जगह तो चाहिए
एक –
लाश आज
एक –
लाश कल
अब तो शमशान वालो से दोस्ती हो जाए
अच्छा हो, कुछ डिस्काउंट तो मिल जाए
कभी बंसी बजाते श्याम सुन्दर मिल जाए
पूछे क्या किया, तो बताये
दुखालय अशास्वतम दुनिया हम जी आये

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