Sri Srimad Radha Govind das Goswami Maharaj

परिचय:
श्री श्रीमद राधागोविन्द गोस्वामी महाराज

श्री श्रीमद राधागोविंद गोस्वामी महाराज का जन्म बिहार के कैमूर जिला के गुरूरा गाव में सन १९४७ के आषाढ़ शुक्ल द्वितीय श्री जगन्नाथ रथयात्रा के दिन हुआ था | ग्रामीण विद्यालयों से हाई स्कूल की शिक्षा लेकर उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने काशी में प्रवास किया | जब वे द्वितीय कक्षा में थे,तब उन्होंने हिंदी पढना प्रारंभ किया | और तभी से ही श्रीरामचरितमानस और श्रीमद भागवतम इनके कंठ पर विराजमान है | बचपन से ही वे एक मेघावी छात्र थे और उनके लिए स्कूल की पढाई मात्र एक औपचारिकता थी | प्रारंभ से ही इनकी रूचि आध्यात्मिक ग्रंथो और वृन्दावन के प्रति गहरी रही है | वे बार-बार भागकर वृन्दावन आया करते थे | जब वे पांचवी कक्षा में पढ़ रहे थे तब इनके हाथ में ‘कल्याण पत्रिका’ लगी,और उसे पढ़कर महाराज ने पत्रिका के संपादक,गीता प्रेस गोरखपुर के हनुमान प्रसाद पोद्दारजी(भाईजी) से सम्पर्क किया | और फिर हनुमान प्रसाद पोद्दरजी के सानिध्य में उन्होंने वैदिक ग्रंथो का गहन अध्ययन प्रारंभ किया | साथ ही साथ श्री चैतन्य चरितामृत के अध्ययन के लिए इन्होने केवल तीन दिनों में ही बंगला सीखी | एक बार कई दिनों से वे गोरखपुर रुके हुए थे | उसी बिच संयोग-वश कुछ दिनों के लिए श्रील प्रभुपदजी भाईजी के अतिथि के रूप में गोरखपुर आए | उस समय महाराज को श्रील प्रभुपाद के सत्संग का सौभाग्य प्राप्त हुआ | भाईजी भी इन्हें श्रील प्रभुपाद के शिष्यत्व के लिए प्रेरित करते रहे | फिर भी जबतक भाईजी रहे,महाराज उन्हें ही गुरु रूप में मानकर उनके स्नेह निर्देशन में शास्त्र अध्ययन किया करते थे | उसी क्रम में महाराजजी ने श्रीमद भागवतम के विभिन्न आचार्यो की टिकाओ का अध्ययन किया | इस प्रकार उन्होंने हिंदी,संस्कृत,बंगला और ब्रज भाषा के वैदिक साहित्यों का गहन अध्ययन किया जिसका आस्वादन इनके प्रवचनों में आज भी हमें सुलभ होता रहता है | भाईजी के नित्य-लीला प्रवेश के बाद महाराज ने श्री धाम वृन्दावन में श्रील प्रभुपाद से दीक्षा ग्रहण की | तबसे महाराज इस्कोन के नियमित भक्त बनकर श्रील प्रभुपाद के दिव्य संदेशोको अपनी भक्तिपूर्ण प्रवचनों से विश्व में प्रचार कर रहे है | इनके श्रीमुख से निकली कृष्ण-कथा सर्वाकर्शक,ममस्पर्शी और ह्रदय गत संदेहों को पूर्णत: दूर करने वाली है, और साथ-ही-साथ जागृत करनेवाली है | विगत काफी वर्षो से महाराज इस्कोन में दीक्षा गुरु के रूप में लोगो को भगवान् श्रीकृष्ण से जोड़ रहे है | अपने दिव्या कथाशैली,साधुता एवं विद्वता के लिए महाराज सुप्रसिध्ध है |
जगद्गुरु श्रील प्रभुपाद की जय ,
श्री श्रीमद राधागोविन्द गोस्वामी महाराज की जय,
हरे कृष्ण.

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