SriSri Radha Shyamsundarji Nauka Vihar

Radhe Radhe dada
Dandvat pranam. Jai Srila Prabhupad.

जनुना किनारे श्याम नौका विहारे
मैंने देख्यो खडी जमुना के आरे
कौन भाग्य सखी पाऊ लीला रे
श्रीजी कृपा से ये अवसर मिला रे
नीलाम्बर राधे संग विहारे रे
हराम्बर श्याम को चित्त हरे रे

रात पानी भरने को करके बहाना
श्याम संदेशो मिल्यो जमुने आना
मटकी धरी दोन्हो राधे तीरे सीधारी
विशाखे श्रींगार करियो लगे अति सारी
रंग-बिरंगी नाऊ स्नेहे सखियन सजावी
श्रीश्री श्यामा-श्याम की जोड़ी प्रेमे पधरावी
कोई भरे उमे मोगरा चमेली, कोई पान पत्तर
कोई सखी प्रेमे करी छिडके ताजा इत्तर
कोई नाना फूल गुलाब के हार सजावे
कोई जगह जगह अलबेल मशाल जलावे
विविध व्यंजन सामग्री कोई प्रेमे करी धरावे
कोई श्यामा श्याम सु ताजा मोती पिरावे
खग चन्द्रमा सोची रह्यो ये क्या अचंबो देख्यो
आज तो नहोती पूर्णिमा पर कालिंदी चाँद भयो
चतुर सुजन नाव चलावे करत है डोलत झोल
भोरी स्वामिनी लिपटी कान्ह से दिसत अनमोल
जैसे बादल लपटी रह्यो चाँद, कदम्ब पर फूल कलि
‘दास’ स्वामिनी श्याम को ये द्वादशी भली फली

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