SriSri Radha Shyamsundarji in Mayur vesh

सखी, ‘दास’ स्वामिनी गावत सुन्दर
सुनी सिखत कोकिल सुन्दर स्वर
श्याम बिहारी एक दिन बिनिबो जू
सिखावो राधे गावन हमको हु
कहे प्यारे, तोको बस नहीं गावन
चोरी चकारी गैया चराईबो वृन्दावन
सुन कान्ह कुवर अडे पकड़ी बहियन
सब कुछ छोड़ी तोसे सिखु में गायन
गुरु राधिका अरु शिष्य कान नटखट
सिखलावे राग श्याम गावे अटपट
भोली भानुनंदिनी बात ये पकड़ी
क्यों सतावे कान्ह, कहकर अकड़ी
तोकों न सिखावु, बिलकुल हो बन्द्दर
दूर जावो इहा से बोली जू मान धर
श्याम नेक लज्जित पकरे जू चरण पर
एक न माने श्याम विन्वे नैन अश्रु धर
मान कर प्यारी गई मान मंदिर गर
खड़ी अटारी ताकती नज़र पर्वत पर
सहसा देखे चपल श्याम रूपु मयूर धर
मोर पिछ जामो मोर पिछ कमर पर
चो और मोर पिछ पहरी मोरे पिछ कर
नुपुर पिछ मुकुट पिछ, मोर पिछ चहु कोर
सुन्दर टाठो मोहन जाए न नैन कही ओर
श्याम ता ता थई थई छेड़े तान सुरताल
राधारानी विस्मित गावे नाचे कान्ह कमाल
रूप निहारी रिजी राधिका बिसर गयो है मान
धर रूप मोरनी को स्वामिनी थिरकत वा के तान
देखि हरखे देवी देवता करे वर्षा पुष्प गुलाल
देखि हरखी दौड़ी आवे नीर भर मेघ रसाल
नेह बरश्यो बरसाने भिन्जे उत ते लाला लाली
‘दास’ स्वामिनी मयूर मयूरी ठुमल ठुमक वनमाली

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