SriSri Radha Shyamsundarji – chudi bechne wale Sri Shyamsundarji

रे सखी छलिया लाडली दर्शन को तडपे
पावत चैन क्षण न इत उत धावत दौड़े
सावन के झूले पडयो है, प्यारी कही न दिखे
तब आवी खबर जू पधारे, श्रीदाम पे रीजे
कैसे धावू, निरखु राधिका, भई लाल चटपटी
सोची गोपी बनू संग घुमु पहर साडी अटपटी
लाल – लाल साड़ी, लाल चुनरिया, लाल बिंदी भारी
रखी माथे टोकरिया माहि हरी लाल पिली चूड़ी सारी
अंजन अखियन, भूसन बहियन, अधरे लाली डाली
काने बुट्टी, नाके चुन्नी, गोपी चूड़ी बेचने चाली
हाथे चुडिया, बांहे चुडिया, चौ तरफ कान्ह छनके
देखन को प्यारी को मुखरो वा को हृदोय रनके
आवी सन्मुख, किये जू दर्शन, सखियन के संग विहरे
चतुर सुजान टेर करत – कोउ सौभागी या चूड़ी पहरे
मेरी चुडिया – जो पहरे वा हुलसे, न पहरे वा तरसे
सुन जू बोली दिखावो चुडिया, जैसे अमृत कान बरसे
दौड़ी दौड़ी श्याम भये सन्मुख, पकड़ी जू की कलैया
स्पर्श पाते लाडली शरमाई, मन मन लेत बलिया
लगे मोहे मिलने वास्ते आये भेष बदल कनैया
चूड़ी छुते ही बनी बडभागी पार लगी मोर नैया
ललिता-विशाखा देखि जू मुखरा जान गयी सब बाते
बैठाई चूड़ी वाली को जू संग, दोन्हो को झुलाते
श्याम पकरी है श्यामा की कलैया, मधुर मधुर मुस्काई
श्यामा पकरी श्याम की बहिया मन मन सकुचाई
निर्लज मेरो श्याम नटनगर पर मोहे लागे अति प्यारो
कब मोहे छाती संग चापे मिले बैरी बिरह रोग छुटकरो
‘दास’ स्वामिनि छबी नैन भरी देखि राखु जतन करी मोय
राखो जू सखियन चेरी बरसाने, राखु वा दोन्ह मोर ह्रदोय

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: