SriSri Radha Shyamsundarji – Sri Shyamsundarji dressed as malan

सखी री आज श्याम मालन बनी हो
पित वरन साड़ी पहर आय ठनी हो
शोभा कैसी –
काने कुंडल, माथे टिका, नाके नथनी
ठुमक ठुमक चाल नटवर हृद मथनी
हाथे भारी चुडा अरु उंगल अंगूठीनी
सोहे गले हजारी हजारी हार लटकनी
माथे टिका जुलत वेणी नज़र अटकनी
ये बड़ी सी चोटी वा में सितारें सटकनी
हाथ लिये फूलमाल चली आवत मालन
श्यामा जू के सुन्दर मुख पर डोरे डालन
कान्ह अपने हाथो गूँथ हार वेणी बनायीं
भाती भाती के सुंगंधि रंगीन फूल लगायी
चंपा, चमेली, जुई, जाई, मालती, मोगरा
गुलाब, कदम्ब, केतकी, करेन, वा डगरा
अरु प्रेम के मोती परोई आवे जू आँगन
छलिया रूप को सहारे मुख दरस मांगन
"लियो रे कोई हार, गजरा, तोरा, वेणी, बाजू"
मीठे रागे साद लगावे कान महल राधा जू
विशाखा के नज़र लगी सुन्दर मालन कान
भानु दुलारी श्रींगार कारन बुलाई करी सान
गजगति तजि मोहन मोहिनी गति सरके
मुख निचा कर, गुन्घट ओढ़ी रह्यो है डरके
जिन हाथे गोवर्धन धर्यो ते लगे माला भारी
कान हैं बांको पर मन हि मन ललिता से डारी
आवी सन्मुख राधा सुंदरी, रूप देखि चक्रायो
कैसे मिलु जू को अकेलो, कैसे सखी भरमायो
अचानक श्याम सखा भंवर बड़ी संख्या में आयो
हार, वेणी, गजरा, तोरा सब पर वे मंडरायो
सखिया सबन को लेकर दौड़ी बाहर जायो
तभी श्याम ने अपने को जू संग अकेलो पायो
गुलाबी हार छूप कर राख्यो वरमाला पहनायो
चौकी राधिका देखि श्याम, मन लज्जा आयो
शरम से लाल राधिका ते पर लाल लाल हार
लाल की आखियाँ देखि लाली गयी दिल हार
हाथ पकरी जू को श्याम सरकयो अति निकट
पहनाई सुन्दर मोगरा वेणी जू चोटी विकट
मंद मंद मुस्काई भागे माखनचोर कर दिल चोरी
‘दास स्वामी’ को काहे लुटत, लाडली जू बड़ी भोरी

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